जयदेव पाठक राष्ट्रीय विचारों के शिल्पकार- देवनानी, संगठन ने श्रद्धेय जयदेव पाठक जन्म शताब्दी समारोप संगोष्ठी का आयोजन किया

जयपुर। आज भाद्रपद कृष्ण नवमी, विक्रम संवत् २०८२,रविवार, १७ अगस्त २०२५ को राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) द्वारा श्रद्धेय श्री जयदेव पाठक जन्म शताब्दी समारोप संगोष्ठी कार्यक्रम जयपुर प्रांत ,मानविकी सभागार, राजस्थान विश्वविद्यालय ,जयपुर में आयोजित हुआ । कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती और श्रद्धेय जयदेव पाठक जी के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण, एवं सरस्वती वंदना से हुआ।




कार्यक्रम के मुख्य वक्ता माननीय शिव प्रसाद, अखिल भारतीय मंत्री विद्या भारती, अध्यक्ष श्रीमान विमल प्रसाद अग्रवाल , पूर्व अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान अजमेर, मुख्य अतिथि माननीय वासुदेव देवनानी, विधानसभा अध्यक्ष राजस्थान विधानसभा जयपुर रहे। कार्यक्रम में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा, प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल, राज नारायण शर्मा नवीन शर्मा ,अशोक शर्मा, कैलाश कच्छावा, जयराम जाट ,नौरंग सहाय भारतीय ,चंद्र प्रकाश शर्मा, मेघराज शर्मा की गरिमामई उपस्थिति रही।


प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने बताया कि संगठन द्वारा सभी अतिथियों के स्वागत के पश्चात प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल ने सभी अतिथियों का परिचय कराया। उन्होंने संगठन की रीति नीति, कार्यशैली पर प्रकाश डाला । उन्होंने संगठन द्वारा किए जाने वाले कार्यक्रमों कर्तव्य बोध संगोष्ठी, नव वर्ष कार्यक्रम ,सामाजिक समरसता कार्यक्रम ,गुरु वंदन कार्यक्रम, विमर्श कार्यशाला ,संभाग विकास वर्ग एवं आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आवाहन पर राजस्थान के 50 जिलों एवं 400 उपशाखाओ के सभी विधालयों में 1 सितंबर 2025 को मेरा विद्यालय मेरा स्वाभिमान कार्यक्रम आयोजित कर सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण से संबंधित पांच संकल्प दिलाएगा। संपूर्ण देश में यह कार्यक्रम 5 लाख से अधिक विद्यालयों में होगा । यह कार्यक्रम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज होने जा रहा है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता माननीय शिवप्रसाद जी अखिल भारतीय मंत्री विद्या भारती ने श्रद्धेय जयदेव जी पाठक के जीवन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मैट्रिक परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने के बाद 1942 में ये अंग्रेजो के विरुद्ध भारत छोड़ो आंदोलन में कूद पड़े। उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया। भोजन कभी मिला तो कर लिया नहीं तो चने चबाकर समय गुजारा, कभी सोने को जगह नहीं मिली तो रेल्वे प्लेट फार्म पर ही सो गए लेकिन देशभक्ति की चिंगारी को बुझने नहीं दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आने पर वे राजस्थान में पूर्णकालिक प्रचारक बनकर आए, फिर संघ के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए अंत तक विद्याभारती के मार्गदर्शक रहे। उन्होंने राजस्थान शिक्षक संघ को राज्य का सबसे बड़ा और प्रभावी संघठन बनाया। राष्ट्र के लिए सर्वस्व समर्पण और अपने लिए कुछ न लेने का उत्कृष्ट उदाहरण पाठक जी में ही देखा जा सकता है। अपने श्रेष्ठ और कर्ममय जीवन से अनगिनत कार्यकर्ताओ को प्रेरणा देकर उस महापुरुष ने उनके जीवन को संस्कारित कर दिया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय वासुदेव देवनानी विधानसभा अध्यक्ष राजस्थान विधानसभा ने कहा कि श्रद्धेय जयदेव जी पाठक के साथ उनका बहुत लंबा सफर रहा, वे मेरे आदर्श है। जिला, विभाग प्रचारक, विद्याभारती, शिक्षक संघ में कार्य करते हुए मुझे उनका सानिध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने हमेशा स्वयं पर कम से कम खर्चा करते हुए, बहुत मित्तव्यता से रहते हुए समाज को अधिक से अधिक देने का प्रयास किया। आज मैं उन्हीं के दिए संस्कारों के कारण जीवन यात्रा में इन ऊंचाइयों तक पहुंच सका। उन्होंने बताया की पाठक जी ने अपने संपूर्ण जीवन का आरक्षण राष्ट्र उत्थान को समर्पित किया वे एक आदर्श स्वयंसेवक थे उनका संपूर्ण जीवन शिक्षा संगठन और राष्ट्र निर्माण को समर्पित था वह अपने जीवन में स्वयं के प्रति बहुत कठोर थे लेकिन कार्यकर्ताओं के लिए वे स्नेह और प्रेम की प्रतिमूर्ति थे उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर उनके जैसा कोई महान मानव दूसरा नहीं हो सकता उन्होंने कहा की शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम ही नहीं है बल्कि यह बालक के चरित्र निर्माण समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है उन्होंने अपने उद्बोधन में शिक्षक संघ राष्ट्रीय का उल्लेख करते हुए कहा की इस विशाल संगठन से जुड़े कार्यकर्ता सदैव राष्ट्र प्रथम की भावना को मन में रखते हुए बालक को शिक्षा के साथ नैतिकता, ईमानदारी और चरित्र का पाठ भी पढ़ते हैं। उन्होंने सभी शिक्षको से पाठक जी के आदशों को जीवन में अपनाने का आव्हान करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विमल प्रसाद अग्रवाल पूर्व अध्यक्ष राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर ने गुरु के महत्व को गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय, दोहे से प्रारंभ कर बताया कि पाठक जी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की उस देव दुर्लभ टोली के सदस्य रहे जिन्होंने राष्ट्रीय मूल्यों की स्थापना, संस्कृति की रक्षा, विश्व शांति, वसुधैव कुटुंबकम्, समाज के कल्याण, शिक्षको और विद्यार्थियों के हित के लिए अपना तन, मन, धन सब कुछ अर्पण कर दिया। उन्होंने कहा कि हमे व्यक्ति की पूजा नहीं, बल्कि उसके गुणों की पूजा करनी चाहिए, पाठक जी जैसे महापुरुषों के सदुणों को जीवन में उतारना
चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्य की सिद्धि के लिए उपकरणों का महत्व नहीं है बल्कि व्यक्ति की साधना ही उसे परिणाम तक पहुंचाती हैं। अपने मन, बुद्धि और आत्मा को शुद्ध करके व्यष्टि, सृष्टि, समष्टि और परमेष्ठी चारो का एक दूसरे के साथ समन्वय कर व्यक्ति अपना सर्वांग विकास कर परम् वैभव की स्थिति तक पहुंच सकता है। अंत में उन्होंने श्रद्धेय जयदेव जी पाठक कोश्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कार्यकर्ताओ से कहा की पाठक जी के जीवन से हमें सदैव विद्यार्थी हित, त्याग, मितव्यता, पद प्रशंसा सम्मान का त्याग , राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ कार्य करना चाहिए । शिक्षक समाज एवं राष्ट्र की दशा एवं दिशा दोनों को बदलने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और यह शताब्दी भारतवर्ष की होगी ,इस यज्ञ में अपना योगदान कर सकता है। उसकी सोच, व्यवहार एवं कर्म श्रेष्ठतम होने चाहिए क्योंकि समाज उसका अनुसरण करता है।

संगठन के जयपुर संभाग उपाध्यक्ष जयराम जाट ने पधारे सभी अतिथियों शिक्षकों एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संचालन प्रदेश महिला मंत्री गीता जैलिया ने किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

सादर
महेंद्र कुमार लखारा
प्रदेश महामंत्री
राजस्थान शिक्षक संघ( राष्ट्रीय)