प्रार्थना सभा से बच्चों में संस्कारवान शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना हो- हनुमान सिंह राठौड़
प्रेस विज्ञप्ति सादर प्रकाशनार्थ
ज्येष्ठ शुक्ल १२ विक्रम संवत २०८३
(26 जून 2026, शुक्रवार)
ABRSM (विद्यालय शिक्षा) राजस्थान- प्रदेश स्तरीय प्रभावी प्रार्थना सभा कार्यशाला संपन्न..!
कार्यशाला में राजस्थान के प्रत्येक जिलों के प्रतिनिधियों सहित शिक्षा जगत के अनेक पदाधिकारी और शिक्षक बंधु उपस्थित रहे।
अजमेर, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के तत्वावधान में आयोजित ” प्रभावी प्रार्थना सभा राज्य स्तरीय कार्यशाला’ का भव्य उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान के अध्यक्ष श्री हनुमान सिंह राठौड़ उपस्थित रहे। विद्यालय में प्रार्थना सभा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष श्री हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि प्रार्थना सभा केवल एक दैनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह वह धुरी है जिससे बच्चों में संस्कारवान शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना होती है। शिक्षकों को अपने व्यवहार एवं आचरण से बालकों के सामने श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करने चाहिए, क्योंकि शिक्षक ही बालकों के लिए अनुकरणीय होते हैं। हमारा संकल्प होना चाहिए कि ‘हमारा विद्यालय हमारा तीर्थ बने’ और इसका प्रारंभ प्रभावी प्रार्थना सभा से ही होता है। अतः हम सभी शिक्षकों को यह प्रयास करना चाहिए कि हमारे विद्यालय की प्रार्थना सभाएं अत्यंत श्रेष्ठ, ऊर्जावान एवं प्रभावी बनें।”
आरबीएसई अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि बच्चों को मोबाइल का विवेकपूर्ण उपयोग करना सिखाएं.
बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ ने बातचीत में बताया कि ‘हमारा विद्यालय— हमारा तीर्थ’ योजना को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी संगठन ने ली है. शिक्षक राष्ट्र और विद्यालय के लिए होता है, लेकिन विद्यालय को तीर्थ बनाने वाले विद्यार्थी होते हैं. विद्यालयों से निकलने वाले बच्चे भविष्य में सभ्य नागरिक बनें, इसलिए भावी युवा पीढ़ी का निर्माण आवश्यक है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की बात की जा रही है, उससे आगे बढ़कर संगठन यह नवाचार कर रहा है. उपनिषदों में भी कहा गया है कि विद्यार्थियों का पंचकोशीय विकास होना चाहिए. इनमें अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश शामिल हैं.
राठौड़ ने कहा कि सोशल मीडिया का अनुशासन चर्चा का विषय है. सोशल मीडिया को रोका जाए तो ज्यादा विस्फोट होगा. लिहाजा, संगठन ने विचार किया है कि विद्यार्थियों को रोकने की बजाय उन्हें शिक्षा और नैतिक चरित्र के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करना और उससे जुड़ा कंटेंट खोजना सिखाया जाए. सोशल मीडिया पर विद्यार्थी क्या देखें, इसकी बजाय यह जरूरी है कि क्या न देखें. उसके प्रति अनुशासन विद्यार्थियों में कायम करने की कोशिश की जा रही है. विद्यार्थियों में सोशल मीडिया का अनुशासन लाने के लिए पहले शिक्षकों को स्वयं पर अनुशासन लाना होगा. शिक्षक स्वयं मोबाइल देखेंगे तो वह विद्यार्थियों को नहीं रोक सकते. घर में अभिभावक मोबाइल देख रहे हैं तो वह अपने बच्चों को मोबाइल देखने से मना नहीं कर सकते. अनुशासन रखना है तो मोबाइल को ‘कर्णपिशाच’ मानकर ही उपयोग करना सीखना होगा, यानी उसको काबू करने का मंत्र भी जानना होगा.
सत्र की अध्यक्षता करते हुए संगठन के प्रदेश महामंत्री श्री महेंद्र कुमार लखारा ने कहा कि “शिक्षकों का यह दायित्व है कि वे प्रार्थना सभा को केवल ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी बनाएं। उन्होंने कहा कि “यदि हम प्रार्थना सभा के समय का सही एवं योजनाबद्ध उपयोग कर लें, तो हम एक अनुशासित, संवेदनशील और संस्कारित भावी पीढ़ी का निर्माण कर सकते हैं। हमारे संगठन का मुख्य उद्देश्य हर विद्यालय तक इस चेतना को पहुँचाना है ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी संस्कृति, नैतिक मूल्यों और देश की गौरवशाली जड़ों से मजबूती से जुड़ी रहे।”

द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता, शिक्षाविद एवं प्रभावी प्रार्थना सभा के प्रदेश संयोजक श्री संदीप जोशी ने अपने प्रभावी उद्बोधन में प्रार्थना सभा के माध्यम से पंचकोश विकास’ (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोष) एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की अवधारणा को व्यापक और वैज्ञानिक रूप से समझाया। उन्होंने कहा कि प्रार्थना सभा बच्चों के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर को ऊंचा उठाने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावी प्रार्थना सभा विद्यार्थियों में से हताश, निराशा और दुर्बलता को दूर करके उनमें उत्साह उमंग और चिंतन के स्वस्थ दृष्टिकोण का विकास कर सकती है। उन्होंने प्रभावी प्रार्थना सभा के लिए पुस्तक संस्कार सरिता के उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री कैलाश चंद कच्छावा ने कहा कि किसी भी रचनात्मक बदलाव को धरातल पर उतारने के लिए उचित प्रबंधन और शिक्षकों के सामूहिक सहयोग की आवश्यकता होती है। जब तक हर शिक्षक प्रार्थना सभा को संस्कार निर्माण की पहली सीढ़ी नहीं मानेगा, तब तक हम अपेक्षित परिणाम नहीं पा सकते।”

— व्यावहारिक सत्र: शिक्षकों के नवाचार और श्रेष्ठ प्रयोग
कार्यशाला के व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) सत्र के अंतर्गत प्रदेशभर से आए प्रतिभागी शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यशाला में आए शिक्षकों ने व्यावहारिक सत्र के अंतर्गत अपने-अपने विद्यालयों में किए जा रहे प्रार्थना सभा से जुड़े श्रेष्ठ प्रयोगों, रचनात्मक गतिविधियों एवं विशेष नवाचारों की शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें अन्य शिक्षकों ने भी अपने विद्यालयों में लागू करने का संकल्प लिया।
— कार्यशाला के आगामी चरण
इस गरिमामयी कार्यशाला में राजस्थान के सभी जिलों के चयनित शिक्षकों ने भाग लिया।
आगामी योजना के तहत प्रांतीय स्तर पर इस सफल आयोजन के बाद, संगठन द्वारा दूसरे चरण में राजस्थान के सभी जिलों में इस प्रकार की जिला स्तरीय प्रभावी प्रार्थना सभा कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इन प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा अपने-अपने जिलों के विद्यालयों की प्रार्थना सभा को प्रभावी एवं संस्कारवान बनाने की दिशा में सक्रिय, निरंतर एवं व्यावहारिक प्रयास किए जा रहे हैं।
कार्यशाला का समापन राष्ट्रगान और उपस्थित शिक्षकों के संकल्प के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन इन्द्रा शर्मा ने किया ।
इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष भंवर सिंह राठौड़ , जिला संगठन मंत्री सत्यनारायण शर्मा,जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह नरूका,जिला मंत्री गुमान सिंह जादौन,जिला कोषाध्यक्ष नासिर काठात सहित अनेक कार्यकर्त्ता बंधु उपस्थित रहे।
सादर!
~जिला मीडिया प्रकोष्ठ अजमेर



